LIVE WIRE
5STARBABA
पुलवामा 2019: 14 फ़रवरी का आत्मघाती हमला — 100 फॉरेंसिक तथ्य, NIA चार्जशीट के साक्ष्य और अनसुलझे सुरक्षा सवाल
मुख्य पड़ताल Military & Defense

पुलवामा 2019: 14 फ़रवरी का आत्मघाती हमला — 100 फॉरेंसिक तथ्य, NIA चार्जशीट के साक्ष्य और अनसुलझे सुरक्षा सवाल

14 फ़रवरी 2019 को जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर लेथपोरा के पास सीआरपीएफ के काफिले पर हुआ आत्मघाती हमला स्वतंत्र भारत के इतिहास के सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक था, जिसमें 40 बहादुर जवान शहीद हुए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की 13,500 पन्नों की चार्जशीट, फॉरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी, बारूदी केमिकल विश्लेषण, खुफिया इनपुट्स और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर आधारित 100 अकाट्य तथ्यों का सम्पूर्ण फॉरेंसिक ऑडिट प्रस्तुत है।

⏱ 18 मिनट पाठ • 🗂 8 साक्ष्य बिंदु
पूरी रिपोर्ट पढ़ें →

मुख्य रिपोर्ट के साक्ष्य बिंदु

सभी साक्ष्य खोलें →
साक्ष्य #1

काफिले का आकार, मौसम की मजबूरी और रूट प्रोटोकॉल (तथ्य 1 से 12)

14 फ़रवरी 2019 को जम्मू के ट्रांजिट कैंप से श्रीनगर के लिए रवाना हुए सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले में कुल 78 वाहन शामिल थे। इस काफिले में विभिन्न बटालियनों के …

साक्ष्य #2

मारुति ईको कार, रूट मैपिंग और मॉडिफिकेशन (तथ्य 13 से 25)

हमले में इस्तेमाल किया गया वाहन एक लाल रंग की मारुति ईको (Maruti Eeco) कार थी। इस कार को आतंकियों ने नवंबर 2018 से फ़रवरी 2019 के बीच काकापोरा के हाजीबल गां…

साक्ष्य #3

आईईडी संरचना, RDX का केमिकल फॉरेंसिक और बारूद का स्रोत (तथ्य 26 से 38)

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) और केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL, चंडीगढ़) के अनुसार, हमले में लगभग 160 से 200 किलोग्राम इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव ड…

साक्ष्य #4

आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार और जैश का नेटवर्क (तथ्य 39 से 50)

आत्मघाती हमलावर का नाम आदिल अहमद डार था, जो पुलवामा जिले के काकापोरा गांव के गुंडीबाग का निवासी था और उसकी उम्र मात्र 20 वर्ष थी। डार ने 12वीं की पढ़ाई बीच …

ताज़ा पड़ताल एवं खुलासे

नई रिपोर्ट पहले
ताशकंद 1966: लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु — मेडिकल विसंगतियां, लापता ऑटोप्सी और अनसुलझे फॉरेंसिक साक्ष्य Political Mysteries

ताशकंद 1966: लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु — मेडिकल विसंगतियां, लापता ऑटोप्सी और अनसुलझे फॉरेंसिक साक्ष्य

11 जनवरी 1966 की देर रात ताशकंद में भारत-पाकिस्तान शांति घोषणापत्र पर हस्ताक्षर के चंद घंटों बाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का आकस्मिक निधन हो गया। आधिकारिक रिकॉर्ड इसे 'एक्यूट मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन' (तीव्र हृदयाघात) घोषित करता है, परंतु विदेशी ज़मीन पर स्वतंत्र फॉरेंसिक पोस्टमॉर्टम का न होना, पार्थिव शरीर पर असामान्य चीरे, संसद की 1970 की बहसें, गवाहों के संदिग्ध सड़क हादसे और आरटीआई में आज तक 'विदेशी संबंधों' का हवाला देकर फाइलों को गोपनीय रखना स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे बड़ा अनसुलझा फॉरेंसिक सवाल बना हुआ है।

9 मिनट पढ़ें →